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VOL. 4, ISSUE 2 (2022)
स्त्री शिक्षा एवं सशक्तिकरण में डॉ. बाबासाहब अंबेडकर जी का योगदानः दृष्टिगत अवलोकन
Authors
डॉ. शैला पी. चव्हाण
Abstract
भारतीय समाज तथा विश्व के साहित्यकारों पर भी डॉ. बाबासाहब अंबेड़कर के विचारों का गहरा प्रभाव रहा है। शिक्षा ही मानव जीवन का उध्दार है ऐसा बाबासाहब मानते थे। डॉ. आंबेडकर दर्शन को अपनी अभिव्यक्ति का आधार मानकर चलने वाले दलित रचनाकारों ने अपना अलग रास्ता चुना। वर्ण-व्यवस्था, सामंतवाद, ब्राम्हणवाद, पूँजीवाद के विरूध्द दलित चेतना से लैस अपने वैचारिक आधार को फुले, शाहू, आंबेडकर, बुध्द से जोड़ने की प्रवृत्तियों ने दलित साहित्य को वैचारिक शक्ति प्रदान की। डॉ. बाबासाहब अंबेडकर मानववंशशास्त्र के गाढे अभ्यासक थे उन्होंने स्त्रियों की सामाजिक समस्याओं का गहराई के साथ अध्ययन किया था। डॉ. भारतीय स्त्रियों के कल्याण के लिए उन्होंने उनकी तबीयत ठीक ना होते हुए भी हिंदू कोड बिल का मसुदा तैयार करने के लिए रात-दिन काम किया था। हिंदू विवाह कायदा - 1955, हिंदू वारसा हक्क कायदा - 1956, हिंदू अज्ञान एवं पालकत्व कायदा - 1956, हिंदू दत्तक एवं पोटगी कायदा - 1956 आदि इन कायदों का निर्माण यह भारत के इतिहास की एक क्रांतिकारी घटना थी जिसके मूल में थे डॉ. बाबासाहब अंबेडकर जी के स्त्रियों के संबंध में अधिकारों विषयक विचार जिन्हें मानव समाज भूला नहीं पायेगा।
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Pages:15-17
How to cite this article:
डॉ. शैला पी. चव्हाण "स्त्री शिक्षा एवं सशक्तिकरण में डॉ. बाबासाहब अंबेडकर जी का योगदानः दृष्टिगत अवलोकन". International Journal of Research in Hindi, Vol 4, Issue 2, 2022, Pages 15-17
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