Logo
International Journal of
Research in Hindi
ARCHIVES
VOL. 4, ISSUE 2 (2022)
131 महादेवी-वर्मा के चिंतन में राष्ट्र
Authors
सुमन
Abstract
किसी भी साहित्य पर तदयुगीन समाज की राजनीतिक,आर्थिक,सामाजिक परिस्तिथियों का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक होता है। 19वी सदी के उतरार्द्ध में भारत पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है। तत्कालीन समाज का अधिकतर साहित्य राष्ट्रीयता की भावना से ओत प्रोत रहा है। छायावाद की पृष्ठभूमि भी राष्ट्रीयता की रही है। महादेवी वर्मा छायावाद की महत्वपूर्ण कवयित्री रही है। उनका साहित्य भी राष्ट्रीयता को समेटे हुए Gsa
Download
Pages:1-4
How to cite this article:
सुमन "131 महादेवी-वर्मा के चिंतन में राष्ट्र". International Journal of Research in Hindi, Vol 4, Issue 2, 2022, Pages 1-4
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.