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VOL. 4, ISSUE 2 (2022)
मानवाधिकारों से वंचित आदिवासी महिलाएँ
Authors
राठोड पुंडलिक
Abstract
सयुक्त राष्ट द्वारा सन- 1948 में स्वीकृत मानवाधिकार घोषणापत्र के अंतर्गत कुल-30 अनुच्छेद हैं। जिनमें विश्व समुदाय द्वारा मनुष्य को प्राकृतिक और गरिमापूर्ण जीवन जीने हेतु आवश्यक अनेक अधिकार प्रदान किए गए हैं जिन्हें कोई सरकार अथवा किसी भी प्रकार की संस्थाओं द्वारा छीना नहीं जा सकता। इसी घोषणापत्र को आधार बनाकर हमारे संविधान निर्माताओं द्वारा संविधान के अंतर्गत मूलभूत अधिकारों की अवधारणा को अंगिकृत करते हुए मौलिक अधिकार भारतीय नागरिकों को प्रदान किया गया है। किंतु विड़ंबना यह है कि आज भी भारतीय आदिवासी समाज इन अधिकारों को प्राप्त नहीं कर पाया है अथवा यूँ कहें कि उनके मानवाधिकारों का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से हनन हो रहा है। आदिवासी समाज प्राचीन काल से वर्तमान तक अपने अधिकारों की मांग हेतु विभिन्न तरीकों को आपनाता रहा है और आज भी संघर्षरत है। इस विषय पर मूख्य धारा को गम्भीर रूप से विचार करने की आवश्यकता है।
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Pages:5-7
How to cite this article:
राठोड पुंडलिक "मानवाधिकारों से वंचित आदिवासी महिलाएँ". International Journal of Research in Hindi, Vol 4, Issue 2, 2022, Pages 5-7
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