ARCHIVES
VOL. 4, ISSUE 1 (2022)
मनुस्मृति में वर्णव्यवस्था जन्म से नहीं, कर्म से मान्य है
Authors
अजित कुमार
Abstract
मनुस्मृति में अनेक स्थलों पर स्पष्ट और सांकेतिक रूप मंे ऐसे वर्णन हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि मनु वर्णव्यवस्था का निर्धारण मूलतः कर्म से मानते हैं, जन्म से नहीं। किसी भी वर्ण में उत्पन्न बालक को माता-पिता अपने वर्ण या अन्य किसी भी वर्ण में दीक्षित करा सकते हैं, किन्तु शैक्षणिक काल में अन्ततः वर्ण का निश्चय, उसके गुण, कर्म, स्वभाव-संस्कार आदि के आधार पर आचार्य करता है। बाद में कर्मों या व्यवसाय के आधार पर उसमें परिवर्तन हो सकता है।
Download
Pages:6-9
How to cite this article:
अजित कुमार "मनुस्मृति में वर्णव्यवस्था जन्म से नहीं, कर्म से मान्य है ". International Journal of Research in Hindi, Vol 4, Issue 1, 2022, Pages 6-9
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.

