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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 3, ISSUE 4 (2021)
पुराणों में विष्णु के दशावतार में वराहवतारः एक परिशीलन
Authors
कुमुद कुमार पाण्डेय
Abstract
भगवान विष्णु को नारायण हरि अन्य नामों से सम्बोधित किया जाता है। जिनका प्रमुख कार्य है जगत का भरण पोषण एवं संचालन करना है वह युगों-युगों में विभिन्न अवतार धारण करते है विष्णु शब्द की व्युत्पत्ति मुख्यतः विष् धातु से ही मान गयी है यास्काचार्य ने मुख्य रूप से ‘विष्’ धातु को ही ‘व्याप्ति’’ के अर्थ में लेते हुए उसे ‘विष्णु’ शब्द को निष्पन्न बताया है। विष्णुपुराण में कहा गया है उस महात्मा की शक्ति इस सम्पूर्ण विश्व में प्रवेश किये गये। इसलिए वह विष्णु कहलाता है। श्रीमद्भगवतगीता के चतुर्थ अध्याय में सुप्रसिद्ध सातवे एवं आठवें श्लोक में भगवान ने स्वयं अवतार का प्रयोजन बताते है कि जब-जब धन की हानि और अधर्म का उत्थान हो जाता है। तब तक सज्जनों के परित्राण और दुष्टों के विनाश के लिए मैं विभिन्न युगों में (माया का आश्रय लेकर) विभिन्न रूप धारण करता हूँ उसी क्रम में भगवान विष्णुु वराहावतार रूप धारण करके महासागर (रसातल) में डुबायी गयी पृथ्वी का उद्वार करते है और हिरण्याक्ष नामक दैत्य का भी वध करते है।
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Pages:3-7
How to cite this article:
कुमुद कुमार पाण्डेय "पुराणों में विष्णु के दशावतार में वराहवतारः एक परिशीलन ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 4, 2021, Pages 3-7
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