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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 3, ISSUE 4 (2021)
हिंदी रिपोर्ताज साहित्य में काल-विभाजन एवं नामकरण के संभावना की पड़ताल
Authors
डॉ. ऋषिकेश सिंह
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र मे हिंदी गद्य साहित्य भी एक महत्वपूर्ण विधा रिपोर्ताज में काल-विभाजन एवं नामकरण की संभावना के ज्यादातर पक्षों को मूल्यांकित करने का प्रयास किया गया है। शोध पत्र में काल-विभाजन एवं नामकरण की महत्ता, गद्य साहित्य मंे उसकी स्थिति विश्लेषण के साथ-साथ रिपोर्ताज के स्वरूप की संक्षिप्त चर्चा की गयी है। हिंदी साहित्य के अंतर्गत कथेतर या अन्य गद्य विधाओं की चर्चा तो की जाती है किंतु उनका निरूपण प्रायः फुटकल या गौण साहित्य के तौर पर ही किया जाता है। जबकि उनके विधागत लेखन ने स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात् मिलाकर लगभग 75 से अधिक वर्षों का कालखंड तय कर लिया है एवं इनमें से कई ऐसी विधाएँ भी हैं जिनमें इतना लेखन तो किया ही जा चुका है कि जिसे आधार बनाकर काल-विभाजन एवं नामकरण किया जा सकता है। रिपोर्ताज उनमें से ही एक विधा है अतः रिपोर्ताज को केंद्र में रखकर एक वैकल्पिक काल-विभाजन एवं नामकरण का प्रारूप प्रस्तुत किया गया है। जिसे अन्य हेतु भी आधार बनाया जा सकता है।
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Pages:1-2
How to cite this article:
डॉ. ऋषिकेश सिंह "हिंदी रिपोर्ताज साहित्य में काल-विभाजन एवं नामकरण के संभावना की पड़ताल ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 4, 2021, Pages 1-2
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