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VOL. 3, ISSUE 3 (2021)
प्रगतिशील आन्दोलन और यशपाल
Authors
एम0 शाबान खान
Abstract
भारत में प्रगतिषील लेखक संघ की स्थापना, प्रगतिषील आंदोलन और यषपाल की भूमिका को सामने लाना इस लेख का उद्देष्य है। प्रगतिषील लेखक संघ की स्थापना से पहले भारत में क्रांतिकारी साहित्य का प्रायः अभाव था। हिंदी साहित्य के अन्तर्गत इतिवृत्तात्मकता और रीतिवाद को ही बढ़ावा दिया जा रहा था। लीक से हटकर मुक्त छंद में रचित रचनाओं की उपेक्षा की जाती रही थी। इसके अतिरिक्त प्रकाषकों और अंग्रेजी सरकार की नीतियों से साहित्यकार पीड़ित थे। इन सभी कारणों को उद्घाटित करते हुए प्रगतिषील लेखक संघ की आवष्यकता, स्थापना और प्रभाव का प्रस्तुत लेख में विष्लेषण किया गया है। सज्जाद ज़हीर और मुल्कराज आनंद के प्रयासों से भारत में प्रगतिषील लेखक संघ की स्थापना हुई और उसकी प्रांतीय कमेटियाँ बनीं। इससे क्रान्तिकारी साहित्य को बढ़ावा मिला। साहित्य में साम्राज्यवाद, पूँजीवाद तथा उपनिवेषवाद का विरोध होने लगा। जिस समय प्रलेस की स्थापना हुई थी, उस समय क्रान्तिकारी यषपाल जेल में थे। भुवाली से वापस आकर वह निरन्तर प्रलेस में अपना सहयोग देते रहे परन्तु कभी मेम्बर नहीं बने। प्रलेस के सदस्य न रहने पर भी उनका और उनके प्रकाषन ’विप्लव’ का पूरा सहयोग रहा। तत्कालीन विवरण, दस्तावेज और तथ्यों के साथ इस लेख में यषपाल की भूमिका को रेखांकित किया गया है।
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Pages:22-24
How to cite this article:
एम0 शाबान खान "प्रगतिशील आन्दोलन और यशपाल ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 3, 2021, Pages 22-24
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