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VOL. 3, ISSUE 3 (2021)
महादेवी वर्मा के गद्य में वैज्ञानिक युग की समस्या एवं समाधान
Authors
डा. भावना पाण्डेय
Abstract
जिस प्रकार अच्छी तरह बुने हुए वस्त्र में उसका ताना-बाना व्यक्त नहीं होता वैसे ही हमारी सांस्कृतिक ऐकता भी प्रत्यक्ष नहीं है। एकता की राजनीतिक और सामाजिक इकाइयों की भूमिका को लेकर वे कहती हैं कि ‘‘युगों के उपरांत हमारा देश एक राजनीतिक इकाई बन सका है, परंतु आज यदि हम इसे सांस्कृतिक इकाई का पर्याय मान लें, तो यह हमारी भ्रांति ही होगी। कारण स्पष्ट है। राजनीतिक इकाई जीवन की बाह्य व्यवस्था से संबंध रखती है, अतः वह बल से भी बनाई जा सकती है। परंतु सांस्कृतिक इकाई आत्मा की उसक मुक्तावस्था में बनती है, जिसमें मनुश्य भेदों से अभेद की ओर, अनेकता से ऐकता की ओर चलता है।’’
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Pages:15-18
How to cite this article:
डा. भावना पाण्डेय "महादेवी वर्मा के गद्य में वैज्ञानिक युग की समस्या एवं समाधान ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 3, 2021, Pages 15-18
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