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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 3, ISSUE 3 (2021)
इलाचंद्र जोशी के उपन्यास ‘‘जहाज का पंछी’’ का मनोविश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
आरती मीणा, श्योराज सिंह ‘बेचैन’
Abstract
उपन्यास आधुनिक गद्य की एक कथात्मक विधा है। जिसका जन्म अठारहवीं शताब्दी में पश्चिम में पूंजीवाद व मध्यवर्ग के उदय के साथ हुआ। उपन्यास का संधि विच्छेद ष्उप़न्यासष् हैए उप अर्थात् निकट तथा ष्न्यासष् अर्थात् थाती। इस आधार पर उपन्यास का अर्थ हुआ . वह रचना जो सामाजिक जीवन के अत्यंत निकट हो। उपन्यास को ष्आधुनिक युग का महाकाव्यष् भी कहते हैं क्योंकि उपन्यास सामाजिक जीवन के भी अत्यंत निकट है। मध्यकाल का समाज अपनी प्रकृति में सरल था जिसमें सभी लोग ग्रामीण व छोटे समुदायों में रहते थे। उनकी जीवनचर्याए नैतिक मूल्य तथा दृष्टिकोण में गहरी समरूपता थी। ऐसे समाज में लोक.गीतए कहानियों और लोक नाट्य जैसी विधाएँ प्रचलित थीं। आधुनिक काल के आते ही स्थितियों में परिवर्तन हुआ। विज्ञान तथा वैज्ञानिक क्रांति ने मनुष्य की अलौकिक आस्थाओं को कमजोर बना दिया। औद्योगीकरण तथा पूंजीवाद की वजह से तेजी से नगरों का विकास हुआ और गाँवों के असंख्य लोग रोजगार की तलाश में शहर पहुँचे। यहीं से मध्यवर्ग का विकास हुआ। यह वर्ग न तो मालिक की तरह अमीर था न ही मजदूरों की तरह गरीब और दुर्दशाग्रस्त। यह वर्ग अपनी ग्रामीण जड़ों से कट चुका था और शहर में भावनात्मक अकेलेपन तथा मनोरंजन के अभाव से पीडि़त था। इस वर्ग के अकेलेपन को दूर करने के लिए नई विधा की जरुरत थी. जिसमें कल्पनाएँ नहीं यथार्थ होए जिसका आस्वादन अकेले किया जा सके। चूँकि प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार हो चुका था और यह वर्ग शिक्षित होने के कारण पाठ्य विधा का आस्वादन कर सकता थाए इसलिए इसके खालीपन को भरने के लिए उपन्यास का जन्म हुआ।
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Pages:11-14
How to cite this article:
आरती मीणा, श्योराज सिंह ‘बेचैन’ "इलाचंद्र जोशी के उपन्यास ‘‘जहाज का पंछी’’ का मनोविश्लेषणात्मक अध्ययन ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 3, 2021, Pages 11-14
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