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VOL. 3, ISSUE 2 (2021)
अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध के महाकाव्य ‘प्रिय प्रवास’ में नारी
Authors
सुरेंदर सिंह
Abstract
हिन्दी साहित्य में अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ का नाम अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है। उन्होंने ‘प्रिय प्रवास’, ‘चुभते चौपदे’, ‘रस कलश’ आदि कालजयी कृतियाँ रचकर हिन्दी साहित्य को अमर कर दिया। इन कृतियों में हरिओध जी ने नारी को अत्यंत सम्मान देते हुए उनके विभिन्न रूपों, भावों, चेष्टाओं, सौन्दर्य का वर्णन किया है। प्रिय प्रवास में हरिऔध जी ने वात्सल्य का वर्णन अनेक प्रकार से किया है। वात्सल्य केवल मातृ तक सीमित न रखते हुए पितृ वात्सल्य, संयोग पक्ष का वात्सल्य, वियोग वात्सल्य का भी वर्णन किया है। नारी के प्रति आशावादी दृष्टिकोण रखते हुए उसे असीमित शक्ति का भंडार माना है। स्त्री को संसार की सुंदर एवं अद्वित्य रचना मानते हुए उन्होंने राधा की सुन्दरता का वर्णन किया है। श्री कृष्ण के मथुरा गमन के पश्चात राधा जी को राष्ट्र सेविका के रूप में दिखाना हरिऔध जी की मौलिकता का स्पष्ट परिचय है। उन्होंने स्पष्ट रूप में वर्णन किया है कि यद्यपि नारी का मन अत्यंत कोमल भावनाओं से भरा होता है परन्तु फिर भी वह अत्यंत साहस से भरी हुई है। राधा के माध्यम से उन्होंने कोमलमना नारी के दृढ़ साहस की सफल व्यंजना की है। उद्धव के आने पर गोकुलवासियों की श्री कृष्ण के वापिस लौटने की उम्मीद टूट जाती है तब राधा उन्हें ढांढस बंधवाती है। हरिऔध जी नारी के सभी पक्षों का वर्णन करने में पूर्णतः सफल हुए हैं।
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Pages:11-14
How to cite this article:
सुरेंदर सिंह "अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध के महाकाव्य ‘प्रिय प्रवास’ में नारी ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 2, 2021, Pages 11-14
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