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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 2, ISSUE 4 (2020)
हिन्दस्वराज की ऐतिहीसिक महत्ता
Authors
Sindhu A
Abstract
वर्तमान समय में आधुनिकता और उससे उत्पन्न विचार और चिंतनपद्धियँ विमर्श के स्तर पर है। 1909 में लिखित गाँधी का ‘हिन्द स्वराज’ आधुनिकीकरण और उससे उत्पन्न उपनिवेशवाद का विमर्श है । यह किताब गाँधी के स्वराज संबन्धी विचारों का संकलन है और पाश्चात्य आधुनिकता का विमर्श भी है। यूरोकेद्रित पूंजीवादी व्यवस्थ पर अधिष्ठित व्यक्तिकेद्रित समाज का विमर्श इसमें देख सकते है। राष्ट्र संबन्धी, सामाज संबन्धि, व्यक्ति जीवन संबंन्धी गाँधी के अपने संक्लनाओं को अथवा तीसरी दुनिया के विचारों को हिन्द स्वराज लिखते है। इस प्रबन्ध के प्रथम भाग में हिन्दस्वराज के संबन्ध में उठे विभिन्न मतों को समेटने का प्रयास किया है। आगे गाँधी के स्वराज संबन्धी विचारों को परखा है। गाँधी ने पाश्चात्य आधुनिकता के बदले देशी आधुनिकता को आगे रखा। राष्ट्र को औपनिवेशिक शक्तियों से स्वतंत्र बनाना उनका लक्ष्य नही बल्कि समस्त मानव की मुक्ति ही उनके विचारों के तहत में है। समता और भाईचारे के संघर्ष के रूप में गाँधी ने स्वाधीनता संघर्ष को बदल। आधुनिकता के समता और भाईचारे के मूल्यों को स्वीकार कर नए संसार के रूपायन के विचारों को गाँधी ने किस प्रकार समाज के समक्ष रखा यही इसमें अध्ययन किया गया है।
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Pages:47-50
How to cite this article:
Sindhu A "हिन्दस्वराज की ऐतिहीसिक महत्ता". International Journal of Research in Hindi, Vol 2, Issue 4, 2020, Pages 47-50
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