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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 2, ISSUE 4 (2020)
छायावादी कवियों में राष्ट्रीय चेतना के स्वर
Authors
प्रिंस कुमार
Abstract
भारतीय राजनीति की दृष्टि से देखें तो सन १९१८ ई० से १९३६ ई० का कालखंड आंदोलनों एवं जनभागीदारी का समय था । उस समय गाँधी, नेहरू, सरदार पटेल, सुभाषचंद्र बोस जैसे नेताओं का प्रभाव जनता पर बहुत था । स्वभाविक है यदि जनता पर स्वतंत्रता आंदोलन का प्रभाव है तो साहित्यकार भी उससे अछूते नहीं होंगे । परंतु साहित्य की दृष्टि से यह समय छायावादी रचनाओं का था जिसके बारे में यह कहा जाता है कि ये कवि वास्तविकता में कम और वायवीय संसार में अधिक विचरण करते हैं । इस शोध का उद्देश्य यही ज्ञात करना है कि क्या वास्तव में छायावादी कवि का सामाजिक जीवन एवं राजनीतिक आंदोलनोंध्हलचलों से कोई संबंध था अथवा नहीं।
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Pages:17-19
How to cite this article:
प्रिंस कुमार "छायावादी कवियों में राष्ट्रीय चेतना के स्वर". International Journal of Research in Hindi, Vol 2, Issue 4, 2020, Pages 17-19
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