Logo
International Journal of
Research in Hindi
ARCHIVES
VOL. 2, ISSUE 3 (2020)
सुदर्शन की कहानियाँ: स्याह पर सफ़ेद की विजय गाथाएँ
Authors
बृज किशोर वशिष्ट
Abstract
सुदर्शन प्रेमचंदयुगीन हिंदी कथा साहित्य के महत्त्वपूर्ण लेखक हैं। उनका पहला कहानी संग्रह सन 1919 में प्रकाशित हुआ और वे देहावसान (सन 1967) तक लगभग पाँच दशक तक विविध लेखन कार्यों में सक्रिय रहे। हिंदी सिने जगत में भी उनका योगदान अभूतपूर्व है। उनकी लगभग प्रत्येक कहानी असत्य पर सत्य की जीत को चित्रित करती है। वे अपनी कहानियों में यथार्थ को प्रतिबिंबित करते हैं लेकिन कहानी जब चरमोत्कर्ष पर पहुँचती है तो वे यथार्थ की कटुता को आदर्श की मिठास में प्रस्तावित करते हैं। इस प्रकार स्याह वास्तविकता की पराजय उनकी कहानियों का मूल मंत्र है। अधिकांश कहानियों में सुदर्शन ने जो समस्या के समाधान दिए हैं वे व्यावहारिक न होकर मानवतावादी हैं। सुदर्शन की कहानियों में युगानुरूप आदर्शवादी दृष्टि का आग्रह स्पष्ट दिखाई देता है। इससे कई स्थलों पर उनकी कहानियों में यथार्थवादी पकड़ ढीली हुई है। उनकी कहानियों में संयोग के रूप में घटनाएँ तीव्रता से घटती हैं। भौतिक सुखों का त्याग इनके पात्र निःसंकोच कर देते हैं। उच्च मानवीय गुणों के प्रदर्शन के लिए वे धन-सम्पदा को ठोकर मारने में देर नहीं करते।
Download
Pages:22-25
How to cite this article:
बृज किशोर वशिष्ट "सुदर्शन की कहानियाँ: स्याह पर सफ़ेद की विजय गाथाएँ". International Journal of Research in Hindi, Vol 2, Issue 3, 2020, Pages 22-25
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.