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VOL. 1, ISSUE 2 (2019)
गोदान: अमर नायक होरी का समसामयिक संदर्भ
Authors
राजीव कुमार प्रसाद
Abstract
गोदान’ कथा सम्राट प्रेमचंदजी की अंतिम और सर्वोत्कृष्ट कृति है | 1936 में प्रकाशित यह उपन्यास यथार्थवादिता की दृष्टि से इनकी विशिष्ट कृति मानी जाती है, जिसका अमर नायक होरी दू:ख में जन्म लेता है, दू:ख में पलता है और दू:ख में मर जाता है | वह जिस आदर्श सुख की कल्पना करता है, वह स्वप्न बनकर रह जाता है | ‘गोदान’ का यथार्थ, समष्टि का यथार्थ है | होरी को एक केन्द्रीय चरित्र के रूप में उपस्थित कर कृषक और श्रमिक वर्ग के शोषण का सजीव चित्र प्रस्तुत किया गया है | प्रत्येक किसान के आर्थिक अभाव की कभी समाप्त न होनेवाले एक लम्बी कहानी का नाम गोदान है | नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के आंकरो के अनुसार वर्ष 1995 से 2014 के मध्य 296438 भारतीय किसानो ने जमींदारो, साहूकारो और बैंको का क़र्ज़ नहीं लौटा पाने के कारण आत्महत्या की है | यही तथ्य अमर नायक होरी के समसामयिक संदर्भ को रेखांकित करती है | होरी का सम्पूर्ण जीवन आर्थिक अभाव की एक करूण कहानी है | वह अंतिम समय तक परिश्रम करता रहा, परन्तु उसके जीवन की कोई भी कामना पूरी नहीं हुई | जी-जान से परिश्रम करने के बावजूद उसे दूध-घी की तो बात ही नहीं अपने तथा अपने बच्चों के तन पर पुरे कपड़े भी नहीं मिले | वह भारतीय कृषक का प्रतिनिधि है, जो कर्ज में ही जन्म लेते है, कर्ज में ही जीते हैं और कर्ज में ही मर जाते हैं | कथा-नायक होरी उपन्यास का आदर्श पात्र नहीं बनकर वर्गगत विशेषताओं का प्रतिक है | होरी के समस्त संघर्षमय चरित्र को एक सूत्र में बंधाते हुए कहा है-“ वह उत्पन्न हुआ, कष्ट भोगता रहा और अंत में निरीह स्थिति में मर गया |” गोदान के रचनाकाल में किसानों के प्रति ऐसी नकारात्मक स्थिति समाज के लिए अभिशाप है | होरी का करुण अवसान, जीवन के यथार्थ को उजागर करने के लिए आदर्श को भूमिगत होता दिखाता है |
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Pages:47-49
How to cite this article:
राजीव कुमार प्रसाद "गोदान: अमर नायक होरी का समसामयिक संदर्भ". International Journal of Research in Hindi, Vol 1, Issue 2, 2019, Pages 47-49
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