ARCHIVES
VOL. 1, ISSUE 2 (2019)
आगरा जनपद में पशु सम्पदा की वर्तमान स्थिति एक भौगोलिक अध्ययन
Authors
नेलिया लोइस डेविड, भरत कुमार
Abstract
आदिकाल से ग्रामीण एवं कृषि प्रधान देश रहा है अतः कृषि और सहायक कार्यो में पशुओं का विशेष स्थान रहा है। खेती करना, बोझा ढोने, यातायात साधन के रूप में इसका प्रयोग होता आ रहा है। इससे दूध, दही, मक्खन, ऊन, चमड़ा, कम्पोस्ट खाद आदि की प्राप्ति होती है। इसका विशेश महत्व है इसलिए इसे पशु संसाधन कहना उचित होगा। भारत में बीसवीं पशु गणना - 2012 के अनुसार पशुओ की संख्या 51.2 करोड़ और पशु गणना 2019 में 53.6 करोड़ दर्ज की गई है। 2012 से 2019 के बीच 4.6 प्रतिशत पशु सम्पदा में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं उत्तरप्रदेश में पशु गणना 2012 के अनुसार भारत के 4 प्रतिशत अर्थात 1.96 करोड़ पशु थे जिनकी संख्या घटकर 2019 में 1.88 करोड रह गई है अर्थात भारत की कुल पशु सम्पदा का 3.83 प्रतिशत है। शोध पत्र आगरा जनपद में पशु सम्पदा की वर्तमान स्थिति का क्षेत्र आगरा जनपद उत्तरप्रदेशराज्य के दक्षिण-पश्चिम में अवस्थित है। यह ऊपरी गंगा मैदान के दक्षिणी भाग का हिस्सा है। आगरा जनपद की कृषि में पशुओं का विशेष महत्व है। इससे कृशकों को गोबर, मूत्र, हड्डी तथा खून के रूप में खाद प्राप्त होती हैं पशु कुंओं से पानी निकालने, खेतों को जोतने तथा अनाज की मण्डियों तक ले जाने का कार्य करते है। ये यातायात तथा भार ढोने के रूप में भी प्रयुक्त होते हैं। पशुपालन से स्वरोजगार प्राप्त होता है इनसे दूध, मांस, ऊन, खाल (चमड़ा) हड्डी जैसी कच्ची सामग्री प्राप्त होती है। इन सभी के निर्यात से आगरा जनपद के निवासियों को करोड़ों रुपये की आय प्राप्त होती है। आगरा जनपद में पशुपालन के अन्तर्गत गोवंशीय पशु (गाय, बैल, बछड़ा), महिषवंशी पशु ( भैंस, भैंसे, पड्डु आदि) भेड़, बकरी, सूअर, घोड़ा आदि पाले जाते हैं। जनपद के कुछ क्षेत्रों के कृषक कुक्कुट पालन भी करते है। आगरा जनपद में गौवंशी पशुओं में गाय-बैल, बछडा-बछिया व सांड प्रमुख है। आगरा जनपद की सांख्यिकी पत्रिका-2018 के अनुसार वर्ष 2012 की पशु जनगणना के अनुसार जनपद में कुल गौवंशी पशु 210964 है। आगरा जनपद में वर्ष 2012 के आकडों के अनुसार 927781 महिषवंशीय पशु पाले गये थे। इनमें 2 वर्ष से अधिक के नर 9196, 3 वर्ष से अधिक की मादा 494889 और पडा व पड़िया 423696 पाले गये। आगरा जनपद में आलू की कृषि का विस्तार हो रहा है जिससे हरे चारे में कमी आ रही है और पशुओं को पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है जिससे पशु कम दूध देते है और यहां पशुओं को चारे के रूप में डठंल व भूसा खिलाया जाता है जिससे पशु कमजोर होते है और दूध भी माँस की कम प्राप्ति होती है। जो पशुपालक कृषक भी है वे अपने खेतों में हरे चारे को बढावा दें जिससे पशुओं को पौष्टिक आहार का चारा मिल सके और जिससे पशुओं से दूध की अधिक प्राप्ति हो सके। हम पशुधन की घटती दर को काफी हद तक सही कर सकते है व घटते पशुधन में वृद्धि करने के लिए पशुपालक को जागरूक होना पडेगा साथ ही सरकार के द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को पशुपालक तक पहुचाने के लिए सही ढंग से क्रियान्वित करना होगा तभी पशुधन में वृद्धि सम्भव है। वहीं सरकार के द्वारा खोले गये पशु चिकित्सालय, पशु औशधालय, पशु सेवा केन्द्र और कृत्रिम गर्भाधान केन्द्रों पर निर्धारित कर्मचारी नियुक्त किये जावें। जिससे पशु सम्पदा की स्थिति बेहतर हो।
Download
Pages:16-19
How to cite this article:
नेलिया लोइस डेविड, भरत कुमार "आगरा जनपद में पशु सम्पदा की वर्तमान स्थिति एक भौगोलिक अध्ययन". International Journal of Research in Hindi, Vol 1, Issue 2, 2019, Pages 16-19
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

