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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 1, ISSUE 2 (2019)
नारी की नई पहचान तलाशती कथाकृतिः अपरिचिता
Authors
दयानिधि सा
Abstract
‘अपरिचिता‘ स्त्री विमर्श की मर्म लिपि के रुप में देखा जा सकता है। एक पढ़ी लिखी, होनहार लड़की किस प्रकार एक संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित एक युवक के शक की शिकार होती है और उसका जीवन दुखमय हो उठता है, इसका चित्रण पूरी तटस्थता से हुआ है। मल्लिका की शादी मनु भाई नामक युवक से तय हुई थी। दोनों ने एक-दूसरे को अब तक नहीं देखा। शादी तय हो गई थी। मनु भाई केवल दूसरों के मुख से मल्लिका की खूबसूरती के बारे में सुना है। मल्लिका अपने सपनों के राजकुमार के साथ विवाह करने का सपना देखा रही होती है। शादी के लिए एक दिन ही बचा है। कन्या पक्ष की ओर से वर पक्ष के घर में सगुन के सामान भेज दिए गए हैं। मल्लिका शादी के पहला दिन में उपवास कर रही है। घर के सभी लोग इस शादी को लेकर बहुत खुश हैं। पर अचानक वर पक्ष की ओर से सगुन के सामान वापस कर दिए जाने पर मल्लिका के घर में मातम छा जाता है। घर के सभी लोग मन मारे बैठ जाते हैं, मल्लिका की हालत तो रो-रो के और भी खराब हो जाती है। इस बेइज्जती को संभालना उसके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। सुबह होने से पहले ही वह भोर से गांव छोड़ देती है और ट्रेन पकड़कर शहर की ओर रवाना हो जाती है।
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Pages:07-09
How to cite this article:
दयानिधि सा "नारी की नई पहचान तलाशती कथाकृतिः अपरिचिता". International Journal of Research in Hindi, Vol 1, Issue 2, 2019, Pages 07-09
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