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VOL. 1, ISSUE 2 (2019)
वसंत बागो से गुजरती अनूप-अशेष की नवगीत यात्रा’
Authors
बीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी
Abstract
अनूप अशेष की नवगीत यात्रा को नजदीक से देखा जाये तो बडी ही सुहावनी एवं मनमोहक बागों की महक से युक्त यात्रा दिखाई देती है। जैसे ऋतुओं केा राजा वसंत ऋतु का आगमन जब धरातल पर होता है तो बाग और बगीचों की आभा अद्वितीय हो जाती एवं सम्पूर्ण चराचर जगत सौन्दर्यता एवं नवीनता से परिपूर्ण होकर चर एवं अचर का मधुर सुगंध से बाग एवं बाटिका का कोना कोना अद्भुत आकर्षण से युक्त हो जाता है जिकसे अनुभव करके कौन ऐसा होगा जो मोहित न हो जाये, अर्थात् मोहित हुए बिना कोई रह ही नहीं सकता है। नवगीत यात्रा तो गाॅंवों के खेतों से सरसों के फूलों को स्पर्श करते हुए पूरे क्षेत्र में पीलिमा एवं सुगंध से आच्छादित वातावरण को अपनी यात्रा की संगनी बनाकर चली है। और वनों पर्वतों की झमाझम वारिस से संगीतमय होकर ताल, तलैया को जगाते हुए यह यात्रा बसंत के बागों से गुजरकर एक ऐतिहासिक यात्रा बनी है।
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Pages:43-44
How to cite this article:
बीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी "वसंत बागो से गुजरती अनूप-अशेष की नवगीत यात्रा’". International Journal of Research in Hindi, Vol 1, Issue 2, 2019, Pages 43-44
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