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VOL. 1, ISSUE 1 (2019)
अज्ञेय का काव्य : विचारणीय बिन्दु
Authors
डॉ. मनोज कुमार कैन
Abstract
अज्ञेय बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं। हिंदी साहित्य के महत्त्वपूर्ण रचनाकार होने के साथ-साथ वे एक क्रांतिकारी, सैनिक, फोटोग्राफर, भारतीय व पाश्चात्य काव्य और विविध कलाओं के जानकार भी थे। उनका कवि कर्म आजादी के पूर्व छायावाद के अंतिम दौर से आरंभ होकर नयी कविता के बाद तक के परिवेश और चिंतन को अपने अंदर समेटे हुए है। उन्होंने काव्य के दोनों अंग संवेदना और शिल्प में तत्कालीन परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न प्रयोग किया है, जिसके कारण हिंदी काव्य परम्परा समृद्ध हुई। अज्ञेय प्रयोगवाद के प्रवर्तक के रूप में हमारे सामने आते हैं और भाषा में नये प्रतीकों, नये उपमानों और नए बिम्बों की सृष्टि करते हैं। उन्होंने साहित्य में उन्हीं शब्दों का प्रयोग किया है जो भाव को श्रोता तक सम्प्रेषित कर सके। फिर चाहे वह शब्द तत्सम, तद्भव, अरबी, फ़ारसी, अंग्रेजी या अन्य किसी भाषा का हो। परिचयरू अज्ञेय हिंदी साहित्य के गौरव पुरुष हैं। उन्होंने अपनी कविताओं में नवीन बिम्बों की सृष्टि की और प्राचीन बिम्बों को अनुभव के आधार पर उन्हें नया अर्थ दिया। हिंदी साहित्य में भी उनकी पहचान प्रयोगवादी कवि के रूप में ही प्रतिष्ठित है। उन्होंने प्रयोगशीलता को अपनी कविताओं में व्यापक महत्त्व दिया है। उनके अनुसार प्रयोगशीलता साहित्य को जड़ होने से बचाती है। अज्ञेय ने कविता की भाषा और शब्दों को अर्थ संप्रेषण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना है। अतः उन्होंने अपनी कविताओं में शब्दों का सीमित प्रयोग करते हुए भी अर्थ की गम्भीरता और भावों का सम्प्रेषण कहीं बाधित नहीं होने दिया है। इसके साथ ही साथ उन्होंने अपने काव्य लेखन द्वारा शिल्प के अन्य अंगों बिम्ब, प्रतीक, नाटकीयता, अप्रस्तुत विधान, व्यंग आदि को भी एक नई धार दी है।
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Pages:23-25
How to cite this article:
डॉ. मनोज कुमार कैन "अज्ञेय का काव्य : विचारणीय बिन्दु". International Journal of Research in Hindi, Vol 1, Issue 1, 2019, Pages 23-25
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