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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 1, ISSUE 1 (2019)
अध्यात्म में काम का स्वरूप
Authors
राजकुमार, नागेन्द्र नागर
Abstract
काम’ शब्द का शाब्दिक अथ र् ह ै कामना; जो सृष्टि प्रक्रिया का अत्यन्त
महत्वपूण र् तत्त्व है।यह सृष्टि-प्रक्रिया क े आरम्भ का तत्त्व है आ ैर इसके
अभाव में सम्प ूण र् बृह्माण्ड की सृष्टि सम्भव नहीं ह ै। सृष्टि क े आरम्भ में
जब ब ्रह्मा जी क े द्वारा रची गयी दैवीय सृष्टि व ृद्धि को न प ्राप्त हुई तब
ब ्रह्माजी सा ेच में पड़ गये आ ैर उसी समय ब्रह्माजी के हृदय से उनक े
समक्ष एक अद्भुत पुरुष प ्रकट ह ुआ।वह तपे ह ुये स्वर्ण के समान
कान्तिधारी,मोटे वक्ष स्थल वाला,उत्तम नासिका वाला,प ूण र् चन्द्र के समान
मुख,उर जंघा ें से युक्त,श्याम गज क े समान आकार वाला, उत्तम
सगन्धिया ें से युक्त आ ैर रक्त वण र् के हाथ-पैर, तिरछे नयनों वाला,प ंच
पुष्पायुध,शीघ्रगामी पुष्प के धनुष से सुशोभित आ ैर श ृंगार रस से सेवित
प ्रकट हुआ।उसक े प ्रकट होते ही ब ्रह्माजी क े दक्षादि समस्त प ुत्रों का
चित्त विकृत हो गया। वह प ुरुष ब ्रह्मा जी से बोला हे ब्रह्मन! म्ौं ं क्या
करूँ ? मुझे ए ेसे कर्म में लगाइये जिससे मैं प ुरुषों में प ्रसिद्ध हूँ। काम
क े इस वचन को सुनकर ब ्रह्मा जी चकित हा े गये आ ैर कुछ देर तक
कुछ न बोले। फिर मन को सावधान कर विस्मय को छोड़कर को अपने
समीप ब ुलाकर बोले-अनेन त्व ं सवरूपेपापुष्पबाण ैश्च
प ंचभिः।मोहयन्पुरुषान् स्त्रीश्च कुरु सृष्टिं सनातनीम।। अस्मि´्जीवाश्च
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Pages:01-03
How to cite this article:
राजकुमार, नागेन्द्र नागर "अध्यात्म में काम का स्वरूप". International Journal of Research in Hindi, Vol 1, Issue 1, 2019, Pages 01-03
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